ROE meaning in hindi

ROE meaning in hindi .

इस से पहले हम कई उपयोगी Ratios (अनुपात) के बारे में जान चुके है, जैसे EPS, PE, PB और Debt to Equity .

आज हम एक और बहुत ही उपयोगी ratio Return on Equity (ROE) के बारे में जानेंगे।

क्या है Return on Equity ? (ROE Meaning in Hindi)

(ROE meaning in hindi)
Return On Equity किसी भी कंपनी में निवेश पर कितना रिटर्न मिला यह बताती है।

यानि किसी भी कंपनी में Equity यानि निवेशक और मालिक के 1 रुपए के निवेश पर कितना रिटर्न मिला यह जान सकते है।

जिस से हमें यह पता चलता है की हमें उस कंपनी में निवेश करना चाहिए या नहीं। ROE meaning in hindi .

इसे ROE भी कहते है।

क्या है Return on Equity का formula?

Return On Equity का Formula है,

return on equity

कंपनी की Total Comprehensive Income में उसकी Equity का भाग देने से हमें ROE मिलती है।

Return on Equity को प्रतिशत में दर्शाया जाता है।

Return on Equity कैसे खोजे ?


किसी भी कंपनी का ROE गिनने के लिए हमें उसकी Balance Sheet और पुरे वित्तीय वर्ष का Profit & Loss Statement चाहिए होगा।

यह दोनों ही हम उस कंपनी की वेबसाइट या कोई Stock Exchange में दिए गए उसके Annual Report में से ढूंढ सकते है।

अगर किसी कंपनी में Equity 100 करोड़ है और उसने इस साल 15 करोड़ का मुनाफा कमाया तो उसका

ROE = 15 करोड़ / 100 करोड़ = 0.15 यानि की 15 % होगा। ROE meaning in hindi .

इस तरह हमें किसी भी कंपनी के लिए उसकी ROE (Return on Equity) ढूंढ सकते है।

एक निवेशक के नजरीए से कंपनी का ROE कम से कम 20 – 25 % तो होनी ही चाहिए। क्यूकी 5% से 7% तक रिटर्न तो साधारण बैंक की FD मे भी मिल जाता है। 12 से 15% का रिटर्न किसी Mutual Fund मे निवेश करने पर भी मिल जाएगा।

अब अगर आप सिर्फ एक ही कंपनी मे पूरा पैसा निवेश कर रहे है, तो Mutual Funds से इसमे Risk भी थोड़ा ज्यादा होगा इस लिए कम से कम 20 से 25% ROE होना जरूरी होता है।

अगर इस से कम है, तो उस कंपनी में निवेश करने से अच्छा किसी Mutual Fund में निवेश कर दो।

जितनी ROE ज्यादा उतना ही ज्यादा उस कंपनी में निवेश पर हमें लाभ मिलने की संभावना है।

ज्यादा ROE के साथ हमें उस कंपनी का Debt to Equity Ratio भी देखना पड़ेगा।

किसी भी कंपनी का ROE भी दो तरीके से बढ़ सकता है। ROE meaning in hindi .

पहला ज्यादा क़र्ज़ ले कर और दूसरा बिना ज्यादा क़र्ज़ लिए या Equity के पैसो से।

अगर कंपनी ने ज्यादा क़र्ज़ लिया है, इस लिए उसका ROE ज्यादा है, तो वह बढ़ा हुआ ROE अच्छा नहीं है।

इसके मुकाबले अगर कोई कंपनी में Equity यानि निवेशकों के पैसो से ROE बढ़ रहा है, तो वही बढ़ा हुआ ROE अच्छा है।

इस लिए सिर्फ ROE को ज्यादा देख कर ही निवेश न करे।

return on equity

कंपनी में क़र्ज़ की स्थिति भी देखे।

और वैसे भी पिछली पोस्ट में हम ज्यादा क़र्ज़ लेने का नुकसान के बारे में तो समझ ही चुके है।

इस लिए अगर आप एक सामन्य निवेशक है, तो Debt to Equity ज्यादा हो उस कंपनी से दूर ही रहे।

निष्कर्ष :

तो दोस्तों इस पूरी जानकारी से हमने यह सीखा की,

ROE कंपनी में निवेश से मिलने वाले रिटर्न की जानकारी देता है।

जितना ज्यादा ROE निवेश के लिए वह कंपनी उतनी ही अच्छी।

लेकिन ROE ज्यादा होने के साथ कंपनी का क़र्ज़ भी नियंत्रण में होना चाहिए।

इस लिए निवेश से पहले किसी भी कंपनी के ROE और Debt to Equity जरूर चेक करे।

दोस्तों उम्मीद करता हु की आपको Return On Equity के बारे में उपयोगी जानकारी मिल गई होगी।

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By Gaurav

Gaurav Popat एक निवेशक, ट्रेडर और ब्लॉगर है, जो की शेयर बाज़ार मे बहुत रुचि रखता है। वह साल 2015 से शेयर बाज़ार मे है। पिछले 7 साल मे खुद अलग अलग जगह से सीख कर और अनुभव के आधार पर शेयर बाज़ार और निवेश के विषय मे यहा पर जानकारी देता है।