Degree of financial leverage kya hai?

Degree of Financial Leverage.

पिछली Post में हमने Financial Leverage के बारे में जाना था।

आज हम Degree of Financial Leverage के बारे में जानेंगे।

 

Degree of Financial Leverage क्या है ?

हम यह जानते है, की EBIT का मतलब है, कंपनी का ब्याज़ और टैक्स देने से पहले का मुनाफा।

और हम यह भी जानते है, की PBT का मतलब है, कंपनी का टैक्स देने से पहले का मुनाफा।

Degree of Financial Leverage हमें यह बताता है, की कंपनी के EBIT में 1 % का बदलाव होने पर PBT पर कितना बदलाव होगा।

यानी अगर कंपनी का EBIT 100 में से 101 होगा तो उसका PBT 35 में से कितना होगा ?

यह Ratio जितना ज्यादा होगा उतना ही ज्यादा कंपनी की कमाई Volatile रहेगी।

और कंपनी में उतना ही ज्यादा Risk बढ़ेगा।

 

DFL का Formula क्या है ?

किसी भी कंपनी का Degree of Financial Leverage उसके PBT में हुए बदलाव को उसके EBIT में हुए बदलाव से विभाजित करने पर मिलता है।

Degree of Financial Leverage

 

Degree Of Financial Leverage का उदाहरण :


Company A के लिए दो साल के EBIT और PBT की जानकारी निचे दि गई है।

Year 2017 2018 Change in %
EBIT 10000 11000 10
INTEREST (6000) (6000) 0
PBT 4000 5000 25
TAX(@ 30 %) (1200) (1500) 25
PAT 2800 3500 25

जिसमे से हम देख सकते है, की साल 2017 के मुकाबले 2018 में EBIT 10% बढ़ा है।
और PBT पहले साल के मुकाबले 25 % बढ़ा है।

इस लिए इस Company A के लिए

DFL = (25 % / 10% ) = 2.5 times होगा।

यानी अगर कंपनी का EBIT 1 % बढ़ेगा तब उसका PBT 2.5 % से बढ़ेगा।

 

एक निवेशक के लिए Degree of Financial Leverage कैसे उपयोगी है ?

एक निवेशक के तौर पर भी हमें इस DFL को जानना जरुरी है।

क्युकी यह हमें बताता है, की कंपनी के क़र्ज़ लेने से उसका Profit कितना बढ़ता है।

और जिस तरह इस क़र्ज़ की वजह से Profit बढ़ता है, उसी तरह नुकसान भी बढ़ सकता है।

जैसे ऊपर हमने Company A का DFL 2.5 times पाया।

तो जिस तरह उसके EBIT 1 % बढ़ने से उसका PBT 2.5 % बढ़ता है, वैसे ही कम भी हो सकता है।

और जब कभी व्यापार में मंदी की वजह से उसका EBIT 10 % कम हो गया तो उसका PBT 25% कम भी हो जाएगा।

इस लिए ज्यादा DFL के होने से कंपनी का Risk भी बढ़ता है।

और इस से कंपनी में निवेश करने वाले निवेशकों का Risk भी बढ़ सकता है।

इस लिए हमें निवेश से पहले यह जरूर देखना चाहिए की कंपनी का DFL कितना है।

ताकी हम बहुत ज्यादा DFL वाली कंपनीओ से दूर रह सकते है, और हमारे निवेश का Risk कम कर सकते है।

 

निष्कर्ष :

दोस्तों आज हमने सीखा की Degree of Financial Leverage क्या है ?

और एक निवेशक के लिए यह कैसे उपयोगी है ?

उम्मीद करता हु आपके लिए यह जानकारी उपयोगी साबित होगी।

अगर आप शेयर बाज़ार से जुड़ी एसी ही जानकारी की Update free मे चाहते है, तो नीचे दिए गए Blue Color के (Subscribe to Updates) के Button को Click करके जो स्क्रीन खुलेगी उसमे yes का विकल्प select कर दीजिए।

By Gaurav

Gaurav Popat एक निवेशक, ट्रेडर और ब्लॉगर है, जो की शेयर बाज़ार मे बहुत रुचि रखता है। वह साल 2015 से शेयर बाज़ार मे है। पिछले 7 साल मे खुद अलग अलग जगह से सीख कर और अनुभव के आधार पर शेयर बाज़ार और निवेश के विषय मे यहा पर जानकारी देता है।