pe ratio kya hai

जाने Price to Earnings Ratio या PE ratio kya hai?

पिछली पोस्ट में हमने EPS यानी Earning Per Share और उसके प्रकार के बारे में जाना था।

आज हम इस से मिलता जुलता अनुपात (ratio) के बारे में सीखेंगे।

यह अनुपात है , Price to Earnings Ratio (P/E ratio).

इसके आलावा हम जानेंगे की P/E ratio का उपयोग किस लिए और कैसे किया जाता है ?

 

Price to Earnings Ratio :



यह Price to Earnings Ratio एक अनुपात है, जो कंपनी के शेयर का दाम और उसके EPS की तुलना करता है।


EPS के बारे में यहाँ से हम पहले ही जान चुके है।


हम किसी भी कंपनी के लिए Price to Earnings Ratio निकाल सकते है, यह Formula है,

 

Price to Earnings Ratio formula :

 
 
Price to Earnings Ratio

जहा पर Market Price of a Share का मतलब है, कंपनी के एक शेयर का शेयर बाजार में दाम और Earning Per Share का मतलब है, उस प्रत्येक शेयर पर कंपनी की कमाई।

इसके आलावा PE ratio का एक और Formula भी है, वह है,

Price to Earnings Ratio
 

Market Capitalization का मतलब है, कंपनी की बाज़ार में कुल कीमत।


Market Cap के बारे में आप विस्तार में यहाँ से जान सकते है : Market Capitalization in Hindi


Total Comprehensive Income for the year का मतलब है, कंपनी की उस साल की पुरी कमाई।


इसके बारे में हमने Profit & Loss Statement Part 2 में जाना था।


अब जान लेते है की ,

 

P/E ratio का उपयोग किस लिए और कैसे किया जाता है ?


जब भी हम किसी कंपनी की क़ीमत का मूल्यांकन करना चाहते है, तो सबसे पहले जिस अनुपात या ratio के बारे में पता लगाना चाहिए वह है, P/E ratio .


P/E ratio से हमें पता चलता है, की हम 1 रुपए की कमाई के लिए कितने रुपए दे रहे है।

 

उदहारण :


जैसे अगर किसी कंपनी का PE 15x है, तो हम ऐसा समझ सकते है, की हम हर साल 1 रुपए की कमाई वाले शेयर के लिए 15 रुपए दे रहे है।


यानी हम उस शेयर से 15 साल में 15 रुपए कमा लेंगे और तब हमें हमारे निवेश पर 100 % का रिटर्न मिलेगा।


दुनिया के सबसे सफल निवेशक Warren Buffett का कहना है, की अगर किसी शेयर का PE ratio 15 से ज्यादा है, तो उसे महंगा कह सकते है।


और अगर उसका PE ratio 15 से कम है, तो उसे सस्ता कह सकते है।

Price to Earnings Ratio
 

इस लिए हमें वैसे ही शेयर चुनने चाहिए जिनका PE ratio 15 स कम हो।


हा लेकिन इसके आलावा भी बहुत चीज़े देखनी पड़ती है।


सिर्फ किसी कंपनी के शेयर का PE ratio 15 से निचे होनेसे ही नहीं खरीद सकते।


क्युकी अगर कंपनी में कुछ समस्याएँ है, तब भी कंपनी का PE ratio 15 से बहुत निचे जा सकता है।


और ऐसी कंपनी में निवेश से हमें बचना चाहिए।


अच्छी कंपनिया सस्ते दाम पर ढूँढना इतना भी सरल नहीं होता।


इस लिए बिना सोचे समझे कभी भी निवेश नही करना चाहिए।


इस तरह के और भी ratio है, जिसमे से हम PB ratio के बारे में पहले ही जान चुके है।


बाकि के ratio के बारे में हम आने वाले दिनों में जानेंगे।


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तो दोस्तों यह थी Price to Earnings Ratio के बारे में पूरी जानकारी।


उम्मीद करता हु आपके लिए यह जानकारी उपयोगी साबित होगी।

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By Gaurav

Gaurav Popat एक निवेशक, ट्रेडर और ब्लॉगर है, जो की शेयर बाज़ार मे बहुत रुचि रखता है। वह साल 2015 से शेयर बाज़ार मे है। पिछले 7 साल मे खुद अलग अलग जगह से सीख कर और अनुभव के आधार पर शेयर बाज़ार और निवेश के विषय मे यहा पर जानकारी देता है।